सिगमण्ड फ्रायड : व्यक्तित्व का मनोवैश्लेषिक सिद्धांत

व्यक्तित्व के मनोवैश्लेषिक  सिद्धांत का प्रतिपादन सिग्मंड फ्रायड (१८५६-१९३९)ने किया। यह सिद्धांत मानव प्रकृति के विषय में कुछ पूर्वकल्पनाओं पर  आधारित है। मानव व्यवहार  बाह्य कारकों द्वारा निर्धारित होता है तथा ऐसे व्यवहार अविवेकपूर्ण ,अपरिवर्तनशील ,समस्थितिक तथा ज्ञेय होते हैं। मानव प्रकृति पूर्णता शरीर गठनि तथा अप्रलक्षता जैसी पूर्वकल्पनाओं से सामान्य ढंग  से प्रभावित होती हैं। इन्हे फ्रायड ने निम्न वर्गीकरण से समझाया है ---
मनोविश्लेषिक सिद्धांत -
1 . व्यक्तित्व की संरचना ---
(अ )  आकारात्मक मॉडल . >1 चेतन    2  अर्धचेतन    3  अचेतन 
(ब )   गत्यात्मक मॉडल या संरचनात्मक मॉडल .>     1 .  उपाहं  (इदं )   2 . अहम्    3 .  पराहम 
2 व्यक्तित्व की गतिकी  --
( अ ) मूलप्रवति  . > 1  जीवन मूलप्रवति     2 . मृत्यु मूलप्रवति 
(ब )  चिन्ता   . > 1.   वास्तविक चिंता    2 . तंत्रिकातापी चिंता   3 .  नैतिक चिंता  
(स ) अहम् रक्षात्मक प्रक्रम  . > 1 दमन  2 यौक्तिकरण  3   प्रतिक्रिया निर्माण   4 प्रतिगमन   5  प्रक्षेपण                            6   विस्थापन     
3 . व्यक्तित्व का विकास --
(अ ) वयस्क व्यक्तित्व   . 1   मुखावस्था  2  गुदावस्था 3 लिंग प्रधान अवस्था 4  अव्यक्तावस्था                             5  जननेंद्रियावस्था 
          फ्रायड के मनोविश्लेषण सिद्धांत का उपयोग स्वप्न विश्लेषण  पपाराप्रेक्सिस तथा मनोचिकित्सा के लिए किया जाता है। 


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