अहम् रक्षात्मक प्रक्रम

 अहम् रक्षात्मक प्रक्रम--अहम् रक्षात्मक प्रक्रम का विचार सिगमण्ड फ्रायड ने दिया किन्तु इसकी सूची उनकी पुत्री अन्ना फ्रायड तथा अन्य नव - फ्रायडियन द्वारा पूरा किया गया। इसके सम्बन्ध में उन्होंने बताया ---

१ -अहम रक्षात्मक प्रक्रम अहम को चिंताओं से बचा पता है। 

२ -सभी रक्षात्मक प्रक्रम अचेतन स्तर पर कार्य करते है। अतः वे आत्म -भ्रामक होते हैं। 

३-ऐसे रक्षात्मक प्रक्रम वास्तविकता के प्रत्यक्षण को विकृत क्र देते हैं फलस्वरूप व्यक्ति के लिए चिंता का स्वरूप कम धमकीपूर्ण हो जाता है।  

इनमे मुख्य राक्षत्मक प्रक्रम इस प्रकार हैं --

दमन -चयनात्मक विस्मरण की घटना 

यौक्तिकरण -युक्ति ढूंढ़ना।  जैसे -अंगूर खट्टे हैं।                                                                             

 प्रतिक्रिया निर्माण -इच्छा या प्रेरणा से विपरीत इच्छा या प्रेरणा विकसित करके। जैसे --सौ- सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। या मुँह में राम बगल में छुरी। 

प्रतिगमन -पीछे की ओर जाना। जैसे -वृद्ध व्यक्तियों का स्वयं को युवा दिखने के लिए बल रंगना। 

प्रक्षेपण -आरोपित करने की प्रक्रिया। जैसे स्वयं की गलतियों का दोषी दूसरों को बताना। 

विस्थापन -अचेतन से हटाकर दूसरे व्यक्ति या  वस्तु से संबंधित कर लेता है। जैसे  संतानहीन स्त्रियों का दूसरे बच्चों से लगाव। 

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