युंग का सिद्धांत
युंग का सिद्धांत -युंग फ्रायड के सहयोगी थे किन्तु उन्होंने फ्रायड से भिन्न विचार दिए। उन्होंने व्यक्तित्व के लिए मन पद का उपयोग किया। यह एक ऐसी सम्पूर्णता है जिसमे सभी तरह के चिंतन , भाव व्यव्हार चेतन एवं अचेतन की प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं।
संरचना --(१)चेतन एवं अहम् (२) अचेतन ( अ ) व्यक्तिगत (ब ) सामूहिक या पारवैयक्तिक ब- १ ) पर्सोना
(ब -२ ) एनिमा तथा ऐनिमस (ब -३) छाया
(३ )आदिरूप (४) मनोवृत्ति एवं प्रकार्य
(अ ) मनोवृत्ति (ब ) प्रकार्य
(अ -१ ) अंतर्मुखी (ब -१ ) संवेदन
(अ -२) बहिर्मुखी (ब -२ )चिंतन
(ब -३ ) भाव
(ब -४ ) अंतर्ज्ञान
(५) मनोवैज्ञानिक प्रकार
(अ )बहिर्मुखी चितन प्रकार (ब ) बहिर्मुखी भाव प्रकार (स )बहिर्मुखी संवेदी प्रकार
(द )बहिर्मुखी अंतर्ज्ञान प्रकार (य ) अंतर्मुखी चिंतन प्रकार (र ) अंतर्मुखी भाव प्रकार
(ल )अंतर्मुखी संवेदी प्रकार (व) अंतर्मुखी अंतर्ज्ञान प्रकार
व्यक्तित्व की गतिकी --(१) विलोम का नियम (२) तुलयता का नियम (३) इन्ट्रोपी का नियम
व्यक्तित्व का विकास --(१) बाल्यावस्था (२)आरम्भिक यौवनावस्था (३) मध्यावस्था (४ )वृद्धावस्था
युंग की अध्धयन विधियां --शब्द साहचर्य ,लक्षण परीक्षण ,स्वप्न विश्लेषण।
मूल्यांकन --(१ ) युंग ने अपने सिद्धांत में सामूहिक अचेतन के सम्प्रत्य का जो प्रतिपादन किया उसे आधुनिक मनोवैज्ञानिकों ने अचेतन के स्वरुप को समझने की दिशा में एक नया कदम बतलाया है।
(२) मनोग्रंथि तथा मनोवैज्ञानिक प्रकार को मनोवैज्ञानिकों ने उपयोगी बताया है।
दोष --
(१) व्यक्तित्व सिद्धांत को एक असंगत और असमन्वित तंत्र कहा है।
(२) आदिरूप सम्प्रत्य एक अर्थहीन सम्प्रत्य है।
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