वर्धन और विकास का अर्थ
वर्धन का अर्थ -वर्धन का गहरा सम्बन्ध परिपक्वता से है ,अनुवांशिकता के प्रभाव के कारण प्राणी में जो जैविक परिवर्तन होता है उसे ही वर्धन या परिपक्वता कहते हैं। व्यक्ति के शरीरिक आकार ,लम्बाई तथा वजन में होने वाले परिवर्तन को वर्धन कहते हैं। वर्धन का निरिक्षण किया जा सकता है तथा इसे मापा जा सकता है। इसका स्वरुप संरचनात्मक होता है। जैसे -किसी बालक की लम्बाई का मापन ,या वजन का मापन।
विकास का अर्थ -विकास व्यक्ति के जीवन में उसके सम्पूर्ण जीवन चलने वाली प्रक्रिया है। इसके द्वारा प्राणी के अंदर होने वाले विभिन्न परिवर्तनों का बोध होता है जिनका मात्रात्मक मापन सम्भव है साथ ही ऐसे परिवर्तनों का भी पता चलता है जिनका मात्रात्मक मापन सम्भव नहीं है।किसी प्राणी के पूर्ण जीवन विस्तार में होने वाले परिवर्तनों के क्रम को विकास कहते हैं। विकास कार्यात्मक होता है अतः इसका मापन संभव नहीं है यह जन्म से मृत्यु तक चलता रहता है। जैसे -मानसिक विकास ,सामाजिक विकास, नैतिक विकास, संवेगात्मक विकास आदि।
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