बालक का शारीरिक विकास

बालक का शारीरिक विकास  बालक का शारीरिक विकास उसकी प्रत्येक अवस्था में भिन्न होता है।  एक नवजात शिशु चार से पांच वर्ष में एक पूर्ण विकसित स्वरुप में परिवर्तित होता है। चार माह का बालक २३'' - २४'' तथा एक वर्ष े में २८ ''-३०'' तक की लम्बाई का हो जाता है।  यह अपने जन्म के भार का दुगना हो जाता है। एक वर्ष का शिशु जन्म के भार का तिगुना वजन प्राप्त कर  लेता है। जन्म के समय नवजात शिशु के शरीर के  क्षेत्रफल की अपेक्षा उसके  सिर का क्षेत्रफल २१%होता है। जबकि ५ वर्ष की अवस्था में यह केवल १३% ही रह जाता है और आयु बढ़ने के साथ -साथ सर की अपेक्षा शरीर का आकार अधिक हो जाता है। इस समय शिशु की हड्डियां बहुत ही कोमल ,मुलायम ,स्पंजी और लचीली होती हैं।  उनके अस्थाई दांत ६-८ माह बाद निकलना प्रारम्भ हो जाता है। तीन वर्ष की आयु तक लगभग २० अस्थाई दांत निकल आते हैं। 

पूर्व बाल्यावस्था (२-६ वर्ष )में ७.-८ सेंमी की दर से हर साल बढ़ती है। ५ वर्ष का बालक अपने जन्म समय की लम्बाई का दुगुना हो जाता है ,इस समय बालक की लम्बाई ३५ से ४० इंच तथा भार में ३-५ पौंड की वृद्धि प्रति वर्ष होती है।  ५ वर्ष का बालक अपने जन्म के भार का पांच गुना अधिक हो जाता है।  यौन भिन्नता के कारण इस अवस्था के बालक बालिकाओं में कुछ विशेष अंतर नहीं होता।  वे दोनों समान होते हैं। 

उत्तर बाल्यावस्था( ६-१२ वर्ष )में लम्बाई तथा वजन में वृद्धि  धीमी गति से होती है। परन्तु ११-१२ वर्ष की आयु में लड़कियां लड़कों से वजन में भरी तथा लड़के लड़कियों से अधिक लम्बे हो जाते हैं। इस अवस्था में आसिफिकेशन के कारण अस्थियां कठोर हो जाती हैं।  

किशोरावस्था (१२-से १८ वर्ष ) में लड़कियों की लम्बाई ५८ इंच तथा १८ वर्ष के लड़के ६६ इंच तक पहुंच जाते हैं। जबकि १८ वर्ष तक आते -आते लड़कियों की लम्बाई रुक जाती है।  

वयस्कवस्था प्राप्त करते -करते शारीरिक वृद्धि रुक जाती है। परन्तु वजन में वृद्धि होती रहती है। 

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