कुर्ट कोफ्का का व्यक्तित्व सिद्धांत
कुर्ट कोफ्का का व्यक्तित्व सिद्धांत
कुर्ट कोफ्का एक जर्मन मनोवैज्ञानिक थे यह बर्लिन के रहनेवाले थे तथा यहीं इन्होने शिक्षा प्राप्त की
इन्होने धारणाओं ,श्रवण दोष ,मस्तिष्क विकृति ,मरीजों के सिखने के तरीकों पर विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिपादन किया
इन्होने 20 वीं सदी में मैक्स वर्दीमर एवं कोहलर के साथ मिलकर गेस्टाल्ट वादी सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिस व्यक्तित्व सिद्धांत के नाम से जानते हैं
1913 मे बेटरेज जर साइकोलोजी गेस्टाल्ट शीर्षक से विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिपादन किया
द ग्रोथ ऑफ़ माइण्ड 1921 इनका बड़ा योगदान था
प्रिंसिपल ऑफ़ गेस्टाल्ट साइकोलोजी (1935 ० पुस्तक ने गेस्टाल्ट समूह के लोगों एवं विद्ध्यार्थियों को गेस्टाल्ट सिद्धांतों समझने में सहायता की
गेस्टाल्टएक जर्मन शब्द ही जिसके लिए अंग्रेजी भाषा में उपयुक्त पर्यायवाची शब्द नहीं है इसका अर्थ पूर्णता या समग्रता के रूप में लिया जाता है
गेस्टाल्ट वादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अधिगमकर्ता जो कुछ भी सीख रहा होता है उसका समग्र रूप से प्रत्यक्षीकरण करता है तथा उसमे निहित संयोगों अथवा संयोजनों के प्रकार का विश्लेषण करता है व प्रत्यक्षीकरण एवं तार्किक विश्लेषण के माध्यम से निष्कर्ष पर पहुँचता है
गेस्टाल्ट वादी मनोवैज्ञानिकों (मैक्स वर्दीमर, कोहलर कुर्त कोफ्का ,लेविन )ने सम्पूर्ण परिस्थितियों के प्रत्यक्षीकरण एवं बुद्धिमत्ता द्वारा उचित अनुक्रिया देने की योग्यता को अंतर्दृष्टि (सूझ )कहा है यह मानसिक योग्यता मनुष्यों में अधिक होती है जिससे किसी भी समस्या का उचित समाधान करने में सहायता मिलती है
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