सामाजिक बुद्धि की संकल्पनायें
सामाजिक बुद्धि की संकल्पनायें
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थार्नडाइक ने इस संदर्भ में बुद्धि के तीन प्रकार बताए हैं
- सामाजिक बुद्धि
- अमूर्त बुद्धि
- मूर्त बुद्धि
सामाजिक बुद्धि
सामाजिक बुद्धिसे तात्पर्य ऐसी सामान्य मानसिक क्षमता से है जिसके द्वारा व्यक्ति अन्य लोगों को समझता है तथा व्यवहार करता है सामाजिक बुद्धि वाले लोगों का सामाजिक जीवन काफी अच्छा रहता है तथा समाज में उनकी प्रतिष्ठा होती है
डीवर तथा बालरस्टी के अनुसार -"सामाजिक बुद्धि , बुद्धि का एक प्रकार है जो किसी व्यक्ति ने अन्य व्यक्तियों एवं सामाजिक संबंधों के प्रति व्यवहार में निहित होता है। "
अमूर्त बुद्धि
अमूर्त बुद्धि विषयों के विषय में चिंतन करने की योग्यता को ही अमूर्त बुद्धि कहा जाता है ऐसी बुद्धि में व्यक्ति शब्द, प्रतीक तथा अन्य मूर्तियों के द्वारा चिंतन करता है इस प्रकार की बुद्धि प्रायः दार्शनिकों ,कहानीकारों, गणितज्ञों , कलाकारों एवं साहित्यकारों में अधिक होती है।
टर्मन के अनुसार -"अमूर्त बुद्धि का महत्व छात्रों में अन्य दूसरे तरह की बुद्धि से अधिक होता हैअमूर्त बुद्धि को सैद्धांतिक बुद्धि भी कहा जाता है। "
मूर्त बुद्धि
मूर्त बुद्धि से तात्पर्य ऐसी मानसिक क्षमता से है जिसके द्वारा व्यक्ति मूर्त या ठोस वस्तुओं के महत्व को समझता है, उनके विषय में सोचता है तथा अपनी इच्छा एवं आवश्यकता अनुसार उनमें परिवर्तन लाकर उन्हें उपयोगी बनाता है इसे व्यावहारिक बुद्धि भी कहा जाता है जिन बालकों में मूर्त बुद्धि अधिक होती है वे आगे चलकर एक सफल इंजीनियर या कुशल कारीगर बनने में सफलता प्राप्त करते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें