हावर्ड गार्डनर बुद्धि का सिद्धांत
हावर्ड गार्डनर बुद्धि का सिद्धांत
हावर्ड गार्डनर ने एक नवीन सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसे गार्डनर के बहुबुद्धि सिद्धांत के नाम से जाना जाता है
इस सिद्धांत के अंतर्गत तीन कारकों पर बल दिया गया।
बुद्धि का स्वरूप एकाकी ना होकर बहू कार्य होता है तथा प्रत्येक बुद्धि एक दूसरे से अलग होती है।
प्रत्येक जान या बुद्धि एक दूसरे से स्वतंत्र होती है बुद्धि के विभिन्न प्रकारों से एक दूसरे के साथ अंतः क्रिया करने की प्रवृति पाई जाती है।
प्रत्येक व्यक्ति में विलक्षण योग्यता होती है।
हावर्ड गार्डनर ने 9 प्रकार से बुद्धि का वर्णन किया -
- भाषाई
- तार्किकगणितीय बुद्धि
- स्थानिक बुद्धि
- शारीरिक गतिक बुद्धि
- सांगीतिक बुद्धि
- अंतः पारस्परिक बुद्धि
- अंतः वैयक्तिक बुद्धि
- नैसर्गिक बुद्धि या प्राकृतिक
- अस्तित्ववादी बुद्धि
हावर्ड गार्डनर के अनुसार उपरोक्त तरह की बुद्धि में से प्रथम तीन कुछ ऐसी हैं जिनका मापन बुद्धि परीक्षण द्वारा आसानी से होता है तथा अंतिम छः का स्वरूप कुछ ऐसा है जिसमें बुद्धि के परंपरागत अर्थ को विस्तृत किया गया है तथा इन छः प्रकार की बुद्धि के समर्थन में गार्डनर ने अपने सिद्धांत में विकासात्मक, न्यूरोमनोवैज्ञानिक तथा व्यवहारात्मक साक्ष्य प्रदान किए।
गार्डनर ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक सामान्य व्यक्ति में उपरोक्त नौ तरह की बुद्धि होती है पर कुछ विशेष कारणों से जैसे आनुवंशिकता या प्रशिक्षण के कारण किसी व्यक्ति में अधिक हो जाती है
गार्डनर के सिद्धांत की शैक्षिक उपयोगिता
पाठ्यक्रम कल्पनात्मक लेखन की कला तथा स्वरलिपि जैसे क्षेत्रों को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने हेतु बल दिया जाने लगा है
निर्देश यह शिक्षकों को इस बात के लिए सिद्धांत विशेष रूप से प्रेरित करता है कि विभिन्न प्रकार की बुद्धि के अनुरूप ज्ञान विकसित करने के लिए विशेष निर्देश दिया जाए।
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