बहुतत्त्व सिद्धांत

 बहुतत्त्व सिद्धांत 

इस सिद्धांत के प्रवर्तक थार्नडाइक थे। 

इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि अनिश्चित्त स्वतंत्र तथा प्राधमिक तत्वों का माध्य है। 

बुद्धि में अनेक तत्व विधमान होते है। 

यह सभी तत्व एक दूसरे से स्वंतत्र होते है। 

 जिस प्रकार एक दीवार विभिन्न ईटों  से बनी होती है।प्रत्येक ईट का अपना स्वतंत्र वजूद भी होता है।

 ठीक उसी प्रकार बुद्धि भी विभिन्न तत्वों से मिलकर बनीं होती है तथा प्रत्येक तत्व एक-दूसरे से स्वतंत्र वजूद भी रखता है

  थार्नडाइक ने बुद्धि के तीन प्रकार बताये है। 

  1. मूर्त बुद्धि 
  2. अमूर्त बुद्धि 
  3. यांत्रिक या सामाजिक बुद्धि 

 थार्नडाइक ने बुद्धि चार स्वतंत्र प्रतिमान दिए है -

  1. स्तर 
  2. परास या सीमा 
  3. क्षेत्र 
  4. गति 


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