पदानुक्रमिक सिद्धांत

प्रधानता सूचक सिद्धांत  पदानुक्रमिक सिद्धांत

  •  यह सिद्धांत बर्ट तथा वनर्न ने दिया। स्पीयरमेन का जी कारक सिद्धांत  थर्सटन का समूह कारक सिद्धांत तथा बहु कारक सिद्धांत आदि को ध्यान में रखकर मनोवैज्ञानिकों ने  इन तीनों के तत्वों को एक साथ मिलाकर बुद्धि के एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसे पदानुक्रम सिद्धांत की संज्ञा दी गई। 
  • इस सिद्धांत में बुद्धि को एक पिरामिड से तुलना किया गया है जिसमें बुद्धि के भिन्न-भिन्न तत्वों या कारकों को एक अनुक्रम के रूप में व्यक्त किया गया है
  •  इसके ऊपरी भाग में स्पीयर मैन के G-कारक को रखा गया है जिसकी जरूरत सभी तरह के बौद्धिक या मानसिक कार्य को करने में होती है
  •  दूसरे स्तर पर थर्सटन के समूह कारक के समान दो विस्तृत समूह एक  शाब्दिक शैक्षिक कारक तथा दूसरा व्यवहारिक यांत्रिक कारक को  रखा है
  •  फिर इन दो समूह  कारको को  तीसरे स्तर पर अन्य छोटे-छोटे समूह कार्यों में बांटा गया है 
  • जो  गिलफोर्ड के बहु कारक के समान हैं जैसे शाब्दिक शैक्षिक कारक  को  संख्या कारक आदि में बांटा गया है उसी तरह व्यवहारिक यांत्रिक  कारक  को यांत्रिक कारक, स्थानिक कारक ,मैनुअल कारक आदि में बांटा गया है
  •  आगे विश्लेषण करके फिर इन  कारको  को छोटे-छोटे उपकरणों में बांटा जा सकता है 
  • पदानुक्रम सिद्धांत के सबसे निचले स्तर पर स्पियरमैन

    का   ( S- कारक ) होता है जिसके द्वारा एक ऐसी क्षमता का बोध होता है जिसकी जरूरत सिर्फ एक खास मानसिक कार्य में होती है 
  • बुद्धि के पदानुक्रम सिद्धांत में बुद्धि को एक ऐसा पदानुक्रम मॉडल के रूप में व्यक्त किया गया है जिसका आकार एक वंश वृक्ष के समान होता है जहां जी कारक  सबसे ऊपरी सतह पर तथा  एस कारक   सबसे निचली सतह पर तथा अन्य संकीर्ण  समूहों को इन दोनों के बीच रखा गया है 

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