बुद्धि का द्विकारकीय सिद्धांत
बुद्धि का द्विकारकीय सिद्धांत
बुद्धि का द्विकारकीय सिद्धांत का प्रतिपादन स्पीयरमैन ने 1904 में किया इस सिद्धांत को द्वी तत्व सिद्धंत /द्वी खंड सिद्धांत के नाम से भी जानते हैं
स्पीयरमैन बुद्धि के सामान्य तत्व के अतिरिक्त एक और तत्व को बुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जिसे उन्होंने विशिष्ट कारक का नाम दिया उनके अनुसार सामान्य कारक की आवश्यकता व्यक्ति को जीवन के सभी पक्षों में होती है तथा विशिष्ट योग्यताओ जैसे कला संगीत संख्यात्मक योग्यता आदि के लिए विशिष्ट तत्व का होना जरूरी है। यह विशिष्ट योग्यताऐं व्यक्ति में एक या एक से अधिक भी हो सकती हैं।
बुद्धि का द्विकारकीय सिद्धांतव्यक्ति में 95 % बुद्धि सामान्य जिसका स्त्रोत वंशानुक्रम तथा 5 % बुद्धि विशिष्ट जिसका स्त्रोत वातावरण होता है

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