स्टर्नबर्ग का बुद्धि का सिद्धांत
स्टर्नबर्ग का बुद्धि का सिद्धांत
स्टर्नबर्ग ने वर्ष 1985 में बुद्धि के सूचना संसाधन सिद्धांत का दूसरा नमूना (पैटर्न) दिया।
एक संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक के रूप में स्टर्नवर्ग ने यह दावा किया कि बुद्धि को आलोचनात्मक ढंग से सोचने की क्षमता के रूप में समझा जा सकता है।
उन्होंने मानव बुद्धि में अनेक तत्व शामिल होने की बात कही ,जो निम्नलिखित हैं -
- कूट संकेतन
- अनुमान
- व्यवस्था
- उपयोग
- अनुक्रिया
किसी मानसिक कार्य को करने में व्यक्ति जिस ढंग से सूचनाओं को संसाधित करता है उसे ध्यान में रखते हुए स्टर्नबर्ग ने तीन उप सिद्धांतों के आधार पर बुद्धि के त्रितंत्र सिद्धांत का निर्माण किया।
- स्टर्नबर्ग का त्री - तंत्र सिद्धांत
- संदर्भात्मक सिद्धांत
- अनुभवजन्य उप सिद्धांत
- घटक सिद्धांत
- मेघा घटक
- निष्पादन घटक
- ज्ञान संग्रहण घटक
- विश्लेषणात्मक बुद्धि
- सृजनात्मक बुद्धि
- व्यावहारिक बुद्धि
स्टर्नबर्ग के सिद्धांत की शैक्षिक उपयोगिता
स्टर्नबर्ग सिद्धांत इस बात की ओर संकेत करता है कि विद्यालय में शैक्षिक कार्यक्रम इस तरह से बनाए जाएं कि उसमे तीनों प्रकार की बुद्धि का अधिकतम विकास हो सके ,ना कि केवल विश्लेषक -शैक्षिक कौशल या विश्लेषणात्मक बुद्धि का
स्टर्नबर्ग उनके सहयोगियों ने एक अध्ययन के आधार पर यह बताया कि एक ऐसा पाठ्यक्रम जो व्यावहारिक तथा सृजनात्मक कौशल को अपने में शामिल करता है द्वारा छात्रों में निपुणता पाठ्यक्रम की तुलना में अधिक प्राप्त होती है जिनमें केवल परंपरागत विश्लेषक स्मृति अध्ययन कौशल पर बल दिया जाता है।
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