समाज एवं सामाजिक सम्बन्ध की अवधारणा
समाज एवं सामाजिक सम्बन्ध की अवधारणा
समाज का अर्थ -
- जॉर्ज सिमौल ने समाज को उन व्यक्तिओं का समूह माना है जो अंतः क्रिया द्वारा सम्बन्धित होते हैं।
- फेयर चाइल्ड के अनुसार -समाज व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है जो अपने बहुत से हितों जिनमें अनिवार्य रूप से स्वयं की रक्षा या भरण -पोषण तथा स्वयं को स्थायित्व प्रदान करना सम्मिलित है ,को पूरा करने में सहयोग करते हैं।
- मोरिस गिन्सबर्ग के अनुसार -एक समाज व्यक्तियों का वह समूह संग्रह है जो कुछ संबंधो तथा व्यवहार के कुछ ढंग द्वारा संगठित है जो उन्हें अन्यो से अलग करते हैं जो इन संबंधों में सम्मिलित नहीं है या जो व्यवहार में उससे अलग है।
- सामाजिक संबंध
- व्यक्ति -व्यक्ति के बीच
- व्यक्ति समूह के बीच
- समूह समूह के बीच
- सामाजिक संबंधों के प्रकार
- सामाजिकरण
- जन्म के समय बालक में सभी प्रकार के सामाजिक गुणों का अभाव होता है वह माता पिता एवं समाज के संपर्क में आकर मुस्कुराना पहचानना सीखता है
- सामाजिकरण के मुख्य तत्व
- सकारात्मक चिंतन करना
- सामाजिक संबंधों का बोध तथा आचरण करना
- सामाजिक भूमिकाओं का समुचित निर्वाह करना
- सामाजिक मानकों मूल्य तथा संस्कृति के अनुसार आचरण करना
- समाजीकरण के सोपान
- प्रसरण
- संस्कृतिकरण
- परिपाक
- सामाजिकरण की अवस्थाएं
- शैशवावस्था में सामाजिक विकास
- बाल्यावस्था में सामाजिक विकास
- किशोरावस्था में सामाजिक विकास
- अनुकरण द्वारा सीखना
- प्रतियोगिता द्वारा सीखना
- निर्देशन द्वारा सीखना
- सामाजिकरण के सिद्धांत
- कूले का सिद्धांत
- कूले के अनुसार व्यक्ति का सामाजिकरण दूसरे व्यक्तियों के साथ मिलकर रहने से होता है
- कूले के सिद्धांत को दर्पण सिद्धांत के नाम से जाना जाता है
- इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति स्व का विकास दूसरे व्यक्तियों के साथ अंतःक्रियाओं और अपने मूल्यांकन द्वारा करता है।
- फ्रायड का सिद्धांत
- फ्रायड के अनुसार -व्यक्ति का निर्माण इड इगो और सुपर ईगो से होता है
- समाजीकरण की विशेषताएं
- समाजीकरण सीखने की एक प्रक्रिया है
- समाजीकरण किसी विशेष आयु तक सीमित ना होकर आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है
- समाजीकरण अपनी संस्कृति को ग्रहण तथा आत्मसात करने की प्रक्रिया है
- समाजीकरण एक समस्यात्मक प्रक्रिया है
- समाजीकरण शिक्षा है लेकिन समस्त प्रकार की शिक्षा समाजीकरण नहीं है समाजीकरण व्यापक शिक्षा का एक छोटा सा अंश समाजीकरण है
- समाजीकरण व्यक्ति को सामाजिक भूमिका निर्वाह करने योग्य बनाता है
- समाजीकरण के कारक एवं संस्थाएं
- परिवार
- विद्यालय
- जाति प्रथा
- आर्थिक स्तर
- समुदाय की भूमिका
- प्रशासनिक व्यवस्था
- जनसंचार के साधन का उपयोग
- सामाजिकरण की प्रमुख संस्थाएं
- परिवार
- विद्यालय
- समुदाय
- सामाजिक तथा वैयक्तिक मूल्यों का विकास
- सामाजिक आचरण
- सामाजिक परिपक्वता
- वर्ग प्रतिष्ठा
- भिन्नता
- सामुदायिक भावना
- मातृ -पितृ सेवा
- चरित्र का विकास
- आत्मविश्वास की भावना
- सामाजिक भूमिका
- प्रतिस्पर्धा तथा सहयोग
- राष्ट्रीयता
- अनुशासन
- समाजीकरण के लक्ष्य
- क्षमताओं का विकास
- आधारभूत नियमबद्धता का विकास
- आकांक्षाओं की पूर्ति
- सामाजिक भूमिकाओं को निभाने की समझ
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