सामाजिक संज्ञान

 सामाजिक संज्ञान 

सामाजिक संज्ञान का तात्पर्य उन तरीकों से है जिनके द्वारा व्यक्ति अपने सामाजिक दुनिया के बारे में प्राप्त सूचनाओं की व्याख्या तथा विश्लेषण कर उन्हें याद रखता है तथा उनका उपयोग अपनी आवश्यकता के अनुरूप करता है

 टेलर ,पेप्लाउ तथा सीयर्स के अनुसार

वातावरण में सामाजिक सूचनाओं से व्यक्ति ,किस तरह से अनुमान लगाता है ,का अध्ययन सामाजिक संज्ञान कहलाता है। "

 रेबर  एवं रेबर के अनुसार 

"सामाजिक संज्ञान इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि व्यक्ति किस तरह से दूसरों  तथा अपने द्वारा की गई क्रियाओं का प्रत्यक्षण ,प्रत्यावाहन ,चिंतन तथा उसकी व्याख्या करता है। "

सामाजिक संज्ञान में व्यक्ति उपयोग की गई सूचनाओं के आधार पर सामाजिक वातावरण के बारे में एक विशेष निर्णय पर पहुंचता है 

सामाजिक संज्ञान में व्यक्ति दुसरे व्यक्ति ,सामाजिक समूह, सामाजिक भूमिकाओ  तथा सामाजिक परिस्थिति में अपने में उत्पन्न अनुभूतियों के बारे में सामाजिक निर्णय है। 

सामाजिक संज्ञान में व्यक्ति अपनी सामाजिक दुनिया से सूचनाओ  को प्राप्त कर उसकी व्याख्या विश्लेषण करता है। 

  इनका उपयोग करके सामाजिक वातावरण को समझने की कोशिश करता है 

सामाजिक संज्ञान के तत्व

  1. स्कीमा 
  2. अवधान या ध्यान
  3.  कूट संकेतीकरण 
  4. पुनः प्राप्ति 

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