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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत

 अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत -इस सिद्धांत को प्राचीन अनुबंधन ,सम्बन्ध प्रतिक्रिया सिद्धांत आदि नामों से भी जाना जाता है। इसका प्रतिपादन  ईवान पैट्रोविच पावलव द्वारा किया गया। इसमें इन्होनें अपने प्रयोग कुत्तों पर किये।  संबंध   सम्बन्ध प्रतिवर्त विधि  जन्म हुआ।  इसके द्वारा ही आदत निर्माण जैसी प्रतिक्रया सिखायी जा सकती है।  कृत्रिम उद्दीपक के द्वारा भी शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत सम्बन्ध प्रतिक्रिया धीरे -धीरे आदत बन जाती है।  इस सिद्धांत को     भाषा का विकास के लिए शिक्षा में प्रयोग किया जाता है।  यह मनोवृत्तियों का निर्माण करने में एक सहायक सिद्धांत है।  इससे व्यक्तियों के बुरी आदतों को छुड़वाने तहा अच्छी आदतें व्यव्हार में लेन में मदद मिल सकती है।  सुलेख व् अक्षर विन्नयास जैसे विषयों के शिक्षण में यह अधिक उपयोगी है। 

प्रयत्न एवं भूल सिद्धांत

प्रयत्न एवं भूल  सिद्धांत   - इस सिद्धांत को उद्दीपन अनुक्रिया सिद्धांत ,अधिगम का बंध सिद्धांत ,एस -आर थ्योरी तथा आवृत्ति के सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है।  इसका  प्रतिपादन एडवर्ड ली थॉर्नडाइक किया जो एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे।  इसमें इन्होने बिल्लियों  पर प्रयोग किये तथा अभ्यास द्वारा सीखने पर बल दिया।   इन्होने बताया अभ्यास द्वारा व्यक्ति को किसी भी कार्य में निपुण बनाया जाता है।  इसमें होने वाली त्रुटियों के निराकरण द्वारा सीखने पर बल दिया गया है।  इस विधि द्वारा गणित तथा विज्ञान विषय को सीखने में मदद मिलती है।  यह मनोविज्ञान की बहुत ही प्रचलित विधि है जिसका प्रयोग शिक्षा के लिए उपयोगी साबित हुआ है। 

अधिगम के विभिन्न सिद्धांत

 अधिगम के विभिन्न सिद्धांत -अधिगम (सीखने )के विभिन्न सिद्धांतों का प्रतिपादन विभिन्न मनोवैज्ञानिकों द्वारा किया गया है - १. उद्दीपन अनुक्रिया सिद्धांत -एडवर्ड ली थार्नडाइक  २. अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत - ईवान पैट्रोविक पावलव ३. अंतर्दृष्टि द्वारा अधिगम -कोहलर कोफ्का वर्दीमर  ४. क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत -ब्यूहरस फ्रेडरिक स्किनर  ५. प्रबलन का सिद्धांत -  सी ० एल ० हल  ६. अधिगम का प्राकृतिक दशा सिद्धांत -कुर्ट लेविन  ७. अव्यक्त अधिगम सिद्धांत -एडवर्ड टोलमेन  ८. शाब्दिक अधिगम का सिद्धांत - आसुबेल  ९. स्थानापन्न सिद्धांत -एडविन गुथरी  १०. सामाजिक अधिगम सिद्धांत -अल्बर्ट बंडूरा  ११. अन्वेषण का सिद्धांत -जेरोम एस ० ब्रूनर  १२. अधिगम सोपानिकी सिद्धांत - रॉबर्ट गेने  १३. अनुकरण द्वारा अधिगम- हैग्रिट                                                           ...

किशोरावस्था अर्थ एवं परिभाषा

किशोरावस्था अर्थ एवं परिभाषा   -किशोरावस्था सभी अवस्थाओं से अधिक आनंदमयी एवं उपलब्धियों को अर्जित करने वाली अवस्था है।  इसे ऐज ऑफ़ ब्यूटी भी कहा जाता है। यह जीवन का सबसे कठिन काल है। यह वह अंतिम अवस्था है जो बालक को परिपक्वता की ओर ले जाता है। यह अमूर्त चिंतन की अवस्था है इसे दल भक्ति की  अवस्था भी कहते है। इस अवस्था में किशोरों में अटपटा व्यहार देखने को मिलता है वह उलझनों से घिरे रहते हैं।इसमें तेरह  (THIR TEEN ) से   अट्ठारह   (EIGH TEEN) वर्ष के आयु के किशोरों को रखा जाता है इसलिए इसे टीन  ऐज कहा जाता है। इसे जीवन की बसंत ऋतु भी कहा जाता है। इसमें किशोर समाज में व्यव्हार करना , तार्किक चिंतन करना तथा मित्रता करना सीखते हैं। इसलिए इसे संवेगात्मक परिवर्तन की अवस्था भी कहते हैं। इसे संक्रमण काल के नाम से भी जाना जाता है।  रॉस महोदय के अनुसार -"किशोरावस्था ,शैशवावस्था की पुनरावृत्ति है। " स्टैनले हॉल के अनुसार -" किशोरावस्था प्रबल दबाव ,तनाव ,तूफ़ान व् संघर्ष का काल है। "  वैलेन्टीन के अनुसार -घनिष्ठ व् व्यक्तिगत मित्रता उत्तर किशोरा...

कालसनिक के अनुसार विकास के चरण

कालसनिक के अनुसार विकास के चरण  -  (अ )    गर्भाधान से जन्म समय तक                                             -गर्भावस्था  (ब )    शैशव                                                                            - ( जन्म  से तीन सप्ताह तक )|  (स)    प्रारंभिक शैशव                                                              (1 माह से 15 माह तक )|  (द)    उत्तर शैशव                             ...

बाल्यावस्था का अर्थ एवं परिभाषाएं

 बाल्यावस्था का अर्थ एवं परिभाषाएं   -बाल्यावस्था स्थूल संक्रियात्मक अवस्था है। इसे एक अनोखा काल कहा जाता है। छः वर्ष से बारह वर्ष के बीच की अवस्था होती है। इसे भावी जीवन की सफलता एवं असफलता की नींव का काल कहा जाता है। प्रारम्भिक विद्यालय की आयु का समय भी कहते हैं क्योंकि इस समय बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है। बाल्यावस्था वैचारिक क्रिया की अवस्था भी मणि जाती है। इसमें बालक टोली दल तथा समूह में रहना सीखता है। इस अवस्था में वह  अन्य बालकों के साथ खेलना भी सीखता है। इसे मित्थ्या  परिपक़्वता का काल भी खा जाता है। बालक की कल्पना शक्ति एवं अमूर्त चिंतन के प्रारम्भ का काल बाल्यावस्था को ही कहा जाता है। बाल्यावस्था तीव्र शारीरिक क्रियाशीलता अभिवृद्धि का काल भी मन जाता है। अतः इसे नए कौशलों एवं क्षमताओं के विकास की वृद्धि में स्वर्णिम काल भी कहा जाता है।   रॉस के अनुसार -" बाल्यावस्था को मित्थ्या या छद्म परिपक्वता का काल कहा जाता है।  "  स्ट्रैंग के अनुसार - "बालक अपने को अति विशाल संसार में पता है व उसके बारे में जल्दी से जल्दी जानक...

शैशवावस्था का अर्थ एवं परिभाषाएं

  शैशवावस्था   का अर्थ  -शैशवावस्था सीखने का आदर्शकाल है इसीकाल को भावी जीवन की आधारशिला कहा जाता है।  यह जीवन का महत्वपूर्ण काल है। यह अनुकरण द्वारा सीखने की अवस्था है इस अवस्था में शारीरिक विकास तीव्रता से होता है।यह क्षणिक संवेग की अवस्था है। शैशवावस्था  समुचित सांवेगिक विकास की दृष्टि से स्वर्णिम काल कहलाता है। इस अवस्था में जन्म से पांच वर्ष की अवस्था सम्मिलित है।  शैशवावस्था की परिभाषा -                                                                                                                                   स्टैंग    - "  जीवन  के प्रथम दो वर्षों में बालक अपने भावी जीवन का शिलान्यास करता है। " रॉस के अनुस...

मनोविज्ञान के कुछ महत्वपूर्ण शब्द -

 मनोविज्ञान के कुछ महत्वपूर्ण शब्द -                                                                                                                                                                                  १. शिक्षा -- शिक्षा शब्द शिक्ष धातु से बना संस्कृत भाषा का शब्द है।  २. मनोविज्ञान - मनोविज्ञान शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के साइकोलॉजी शब्द से हुई। जिसका शब्दिक अर्थ है -साइक (आत्मा) +लागस (विज्ञान ). अर्थात आत्मा का विज्ञान।  ३. एजुकेशन - इस शब्द की उत्पत्ति एडुकेयर शब्द से हुई यह लैटिन भाषा से लिया गया शब्द है जिसका ...

व्यवहारवादी सम्प्रदाय

  व्यवहारवादी सम्प्रदाय - इस सम्प्रदाय की शुरुआत जॉन ब्राड्स वाटसन  (जे ० बी ० वाटसन ) द्वारा अमेरिका में  की गई। ये विचारधारा रूसी मनोवैज्ञानिक इवान पेट्राविक पावलव (इ ० पी ० पावलव ) के परीक्षणों केपरिणामों पर आधारित है। व्यवहारवादी संप्रदाय के अनुसार मनोविज्ञान का उद्देश्य मानव व्यवहार को व्याख्या ,नियंत्रण एवं उसके सम्बन्ध में भविष्यवाणी करना है। 

प्रयोजनवादी सम्प्रदाय

                                                        प्रयोजनवादी सम्प्रदाय                                               प्रयोजनवादी सम्प्रदाय को प्रेरकीय सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है। इसका आरम्भ इंग्लैण्ड में विलियम मैक्डूगल द्वारा किया गया। इस संप्रदाय द्वारा आत्म सम्मान को महत्व दिया गया। इस संप्रदाय के अनुसार सभी कार्यों के पीछे कोई - न -कोई उद्देश्य अवश्य होता है। 

साहचर्यवादी सम्प्रदाय

  साहचर्यवादी सम्प्रदाय  -                                                                                                                                        साहचर्यवादी सम्प्रदाय की शुरुआत इंग्लैण्ड में जॉन लॉक द्वारा की गई। इस विचारधारा में स्पंदन तथा स्मृतिज्ञात साहचर्य को महत्त्व दिया है।                  Associate Communist - The Associationalist school was started in England by John Locke.  In this ideology, vibrancy and memorized companionship have given importance.

मनोविश्लेषणवादी सम्प्रदाय

  मनोविश्लेषणवादी सम्प्रदाय - मनोविश्लेषणवादी सम्प्रदाय के प्रवर्तक  ऑस्ट्रिया  के सिग्मण्ड फ्रायड हैं।  इस सम्प्रदाय ने बाल केंद्रित शिक्षा पर बल दिया। इस संप्रदाय ने व्यवहार की संकल्पना में चेतन, अर्द्धचेतन तथा अचेतन व्यवहार  को  सम्मिलित  किया है तथा व्यक्ति का व्यक्तित्व तीन कारकों   इदं  , अहम   तथा  परमहं  से  बताया  है।     मनोविश्लेषणवादी सम्प्रदाय में व्यवहार निर्धारण तथा व्यक्तित्व में यौन कारकों को भी महत्वपूर्ण स्थान  दिया है। स्वप्न विश्लेषण विधि ऐसी संप्रदाय की देन है। मनोविश्लेषणवादी सम्प्रदाय व्यक्तित्व मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण संप्रदाय है। 

गेस्टाल्टवादी सिद्धांत

 गेस्टाल्टवादी सिद्धांत - इस सिद्धांत को समग्राकृति  तथा अवयववादी सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है।  इसका प्रतिपादन जर्मनी के मनोवैज्ञानिक मैक्स वर्दीमर ,कोहलर और कोफ्का द्वारा किया गया। इस सम्प्रदाय के अनुसार  कोई  व्यक्ति  किसी वस्तु का प्रत्यक्षीकरण उसके समग्र रूप में करता है तथा उसे सम्पूर्ण रूप से ग्रहण करता है।   "पूर्ण से अंश की ओर "शिक्षण पद्ध्यति इसी सम्प्रदाय की देन है। 

प्रकार्यवादी सिद्धांत

  प्रकार्यवादी सिद्धांत - इस सिद्धांत के प्रतिपादक अमेरिका के मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स एवं एंजिल ,जॉन डी ०    वी ० हैं।   इस सिद्धांत के द्वारा बाल मनोविज्ञान, व्यक्तिक विभिन्नता ,बुद्धि परीक्षण आदि पर कार्य किया गया। यह सम्प्रदाय पाठयक्रम की विषयवस्तु की उपयोगिता पर बल देता है।                                                    Functionalist Theory - The proponents of this theory are American psychologists William James and Angel, John D.V.  Through this theory work was done on child psychology, personality variation, intelligence test etc.  This community emphasizes the usefulness of the course content.

शिक्षा का संरचनावादी सम्प्रदाय

शिक्षा का संरचनावादी सम्प्रदाय  - इस संप्रदाय के प्रवर्तक जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम वुंट तथा इंग्लैंड के मनोवैज्ञानिक एडवर्ड ब्राडफोर्ड टिचनर  ( इ० बी ० टिचनर ) हैं। विलियम वुंट के  संरचनावादी सिद्धांत के अनुसार मनुष्य की चेतना में मानसिक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह सिद्धांत वैज्ञानिक पद्ध्यति के प्रयोग पर बल देता है।  विलियम वुंट ने मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना जर्मनी के लिपजिग शहर में १८७९ में की। 

टैक्ट क्या है ?

टैक्ट क्या है ?  स्किनर द्वारा प्रतिपादित सीखने के सिद्धांत में टैक्ट  शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ है किसी भी  वस्तु, प्राणी आदि का अवलोकन या वर्णन उसी रूप या नाम से करना जो वह  वास्तव में है-. जैसे हाथी को देखकर उसे हाथी  नाम से सम्बोधित करना। इस शब्द का प्रयोग छोटे बच्चों के द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रियाओं को बताने के  लिए किया गया था। 

व्यक्तित्व मापन की विधियां

व्यक्तित्व मापन की विधियां - व्यक्तित्व मापन  की विधियों को मुख्यता तीन प्रकारो में विभाजित किया गया है --- १ -आत्मनिष्ठ विधियां         २ - वस्तुनिष्ठ विधियां            ३ प्रक्षेपण विधियां  १ अवलोकन                      १ निर्धारण मापनी                १ साहचर्य तकनीक  २ साक्षात्कार                    २ परिसूची या प्रश्नावली          २ रचना तकनीक  ३ जीवन इतिहास             ३ परिस्थिति परीक्षण /            ३ पूर्ति तकनीक                                        समाजमिति विधि                 ४ क्रम तकनीक          ...

अहम् रक्षात्मक प्रक्रम

 अहम् रक्षात्मक प्रक्रम-- अहम् रक्षात्मक प्रक्रम का विचार सिगमण्ड फ्रायड ने दिया किन्तु इसकी सूची उनकी पुत्री अन्ना फ्रायड तथा अन्य नव - फ्रायडियन द्वारा पूरा किया गया। इसके सम्बन्ध में उन्होंने बताया --- १ -अहम रक्षात्मक प्रक्रम अहम को चिंताओं से बचा पता है।  २ -सभी रक्षात्मक प्रक्रम अचेतन स्तर पर कार्य करते है। अतः वे आत्म -भ्रामक होते हैं।  ३-ऐसे रक्षात्मक प्रक्रम वास्तविकता के प्रत्यक्षण को विकृत क्र देते हैं फलस्वरूप व्यक्ति के लिए चिंता का स्वरूप कम धमकीपूर्ण हो जाता है।   इनमे मुख्य राक्षत्मक प्रक्रम इस प्रकार हैं -- दमन - चयनात्मक विस्मरण की घटना  यौक्तिकरण - युक्ति ढूंढ़ना।  जैसे -अंगूर खट्टे हैं।                                                                               प्रतिक्रिया निर्माण - इच्छा या प्रेरणा से विपरीत इच्छा या प्रेरणा विकसित कर...

भग्नाशा या कुंठा

 भग्नाशा या कुंठा -- भग्नाशा या कुंठा व्यक्ति की वह मानसिक स्थिति और भावात्मक दशा है जो अनेक रुकावटों  तथा  परस्पर विरोधी विकल्पों का सामना करने पर उत्पन्न होती है।  कोलसनिक के अनुसार --"भग्नाशा उस आवश्यकता की पूर्ति या लक्ष्य की प्राप्ति में अवरुद्ध होने या निष्फल होने की भावना है ,जिसे व्यक्ति महत्वपूर्ण समझता है। " Frustration is the feeling of being blocked or thwarted in satisfying a need or attaining a goal that the individual perceives as significant." -KOLESNIK गुड के अनुसार - "भग्नाशा का अर्थ है -किसी इच्छा या आवश्यकताओं में बाधा  पड़ने से उत्पन्न होने वाला तनाव। " Frustration means emotional tension resulting from the blocking of a desire or need."  -- GOOD

मानसिक द्वंद्व

मानसिक द्वंद्व   -जब व्यक्ति अपने वातावरण में कुछ ऐसी समस्याओं का सामना करता है जिसमे उसे  अपनी इच्छाओं  और   आवश्यकताओं में से किसी एक का चयन करने के लिए  कहा जाता है।तब मानसिक द्वंद्व  की स्थिति उत्पन्न होती है।  डगलस  व हालैण्ड के अनुसार -- " द्वंद्व  (संघर्ष )  अर्थ है विरोधी और विपरीत इच्छाओं में तनाव के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाली कष्टदायक संवेगात्मक दशा। " "Conflict means a painful emotional state ,which result from a tension between opposed and contradictory wishes." -    DOUGLAS AND HOLLAND क्रो व् क्रो  के अनुसार -- "द्वंद्व उस समय उत्पन्न होते हैं जब एक व्यक्ति को अपने वातावरण में ऐसी शक्तियों का सामना करना पड़ता है जो उसकी स्वयं की अभिरुचियों और इच्छाओं के विरुद्ध कार्य करती हैं। " "Conflict arise when an individual is faced with forces in his environment that act in opposite to his own interests and desires ."      - CROW & CROW फ्रायड के अनुसार -- "इदं, अहम् और परम् क...

इंट्रोपि का नियम

 इंट्रोपि का नियम --यह नियम भौतिकी के थर्मोडाइनेमिक्स के  दूसरे नियम पर आधारित है जिसमे बताया गया है कि  गर्म पानी तथा ठन्डे पानी को सटाकर रखने पर दोनों तत्व तब तक प्रभावित होते हैं जब तक दोनों सामान न हो जाएँ।      इस नियम का प्रयोग युंग ने अपने व्यक्तित्व सिद्धांत  किया है। 

एनिमा तथा एनिमस

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एनिमा तथा एनिमस -- मनुष्य एक उभय लिंगी प्राणी होता है। जिस लिंग की अधिकता उसमें होती है तथा जिस लिंग के हार्मोन्स उसमे अधिक स्त्रावित होते हैं वह वही बन जाता है। .कभी कभी किन्ही परिस्थितियों के कारण स्त्रियों तथा पुरुषों में विपरीत लिंग के हार्मोन्स का स्त्राव अधिक मात्रा में होने लगता है तब ऐसी परिस्थिति में एनिमा और एनिमास की स्तिथि बन जाती है --जैसे -- पुरुषों में स्त्रैण (स्त्री गुण )की अधिकता से ---एनिमा                                    स्त्रियों में पौरुष तत्त्व की अधिकता से ---एनिमस                

युंग का सिद्धांत

 युंग का  सिद्धांत - युंग फ्रायड के सहयोगी थे  किन्तु उन्होंने फ्रायड से भिन्न  विचार दिए। उन्होंने व्यक्तित्व के  लिए मन पद का उपयोग  किया।  यह एक ऐसी सम्पूर्णता है जिसमे सभी तरह के चिंतन , भाव व्यव्हार चेतन एवं अचेतन की प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं।   संरचना -- (१)चेतन एवं अहम्                                                                                                                                                                                                ...

ड्यूशेन रोग के लक्षण

ड्यूशेन रोग के लक्षण --- समय  के साथ -साथ बढ़ने वाला माशपेशियों की कमजोरी का एक रोग है जिसे मांसपेशियाँ  दुर्विकाश कहते हैं | यह आमतौर पर  लड़कों मे  पाया जाता है  और  एक  पीढ़ी से  दूसरे  पीढ़ी  मे  भी जाता है।  १.  धीमी वृद्धि या सीखने  की  कम क्षमता होती है |  २.  असामान्य रूप से  चलना , खड़े  रहने मे  परेशानी , मांशपेशियों  में  कमजोरी, मांशपेशियों  को  नुकसान  या मांशपेशियों  का स्थाई  रूप  से  छोटा  होना  |  ३.   थकान , निगलने  मे   परेशानी , बार - बार  गिरना  आदि  |  उपचार - यह  लाइलाज  है  लेकिन  शारीरिक  चिकित्सा  और  कार्टीकास्टोरॉयड  जैसी  दवाएँ  लक्षणों  में  नियंत्रित  करने  मे  मदद  कर  सकती  है  और  जीवन  को  बेहतर  बना  सकती  है | 

गिल्फोर्ड का बुद्धि संरचना सिद्धांत -

  गि ल्फोर्ड का बुद्धि संरचना सिद्धांत- गिल्फोर्ड के बुद्धि संरचना सिद्धांत के मुख्यता तीन आयाम हैं।  1 . संक्रिया           2 .   विषयवस्तु      3 .  उत्पाद  1 .संक्रिया -     ( 1 ) संज्ञान    (२) स्मृति अभिलेखन    (३) स्मृति धारण   (४) परम्परागत चिंतन  (५) गैर परंपरागत  चिंतन (६) मूल्यांकन  2 . विषयवस्तु - (१ )दृश्य     (२ ) श्रव्य   (३) सांकेतिक   (४) शाब्दिक    (५ ) व्यावहारिक  3 . उत्पाद -   (१) इकाई    (२) वर्ग    (३) सम्बन्ध   (४) प्रणाली    (५) प्रत्यावर्तन   (६ ) निहितार्थ  इन्हे  गिल्फोर्ड ने इस प्रकार दिखाया है ---६*५*६ =१८ ०  किन्तु कुछ समय बाद गिल्फोर्ड ने इस संरचना में परिवर्तन किये। जिसमें उन्होंने संक्रिया के अंतर्गत  स्मृति अभिलेखन और स्मृति धारण को एक धारणा स्मृति तथा  परम्परागत चिंतन तथा गैर परम्परागत चिंतन ...

सिगमण्ड फ्रायड : व्यक्तित्व का मनोवैश्लेषिक सिद्धांत

व्यक्तित्व के मनोवैश्लेषिक  सिद्धांत का प्रतिपादन सिग्मंड फ्रायड (१८५६-१९३९)ने किया। यह सिद्धांत मानव प्रकृति के विषय में कुछ पूर्वकल्पनाओं पर  आधारित है। मानव व्यवहार  बाह्य कारकों द्वारा निर्धारित होता है तथा ऐसे व्यवहार अविवेकपूर्ण ,अपरिवर्तनशील ,समस्थितिक तथा ज्ञेय होते हैं। मानव प्रकृति पूर्णता शरीर गठनि तथा अप्रलक्षता जैसी पूर्वकल्पनाओं से सामान्य ढंग  से प्रभावित होती हैं। इन्हे फ्रायड ने निम्न वर्गीकरण से समझाया है --- मनोविश्लेषिक सिद्धांत - 1 . व्यक्तित्व की संरचना --- (अ )  आकारात्मक मॉडल  . >1 चेतन    2  अर्धचेतन    3  अचेतन  (ब )   गत्यात्मक मॉडल या संरचनात्मक मॉडल .>     1 .   उपाहं  (इदं )   2 . अहम्    3 .  पराहम  2 व्यक्तित्व की गतिकी  -- ( अ ) मूलप्रवति  . > 1   जीवन मूलप्रवति     2 . मृत्यु मूलप्रवति  (ब )  चिन्ता   . > 1.   वास्तविक चिंता ...

DEFINITIONS OF EDUCATIONAL PSYCHOLOGY

DEFINITIONS OF EDUCATIONAL PSYCHOLOGY--- 1. According to KALSNIK - Educational psychology  is the application of psychology theory and research to education .  2. C. E. SKINNER - -Educational psychology uses those research in educational situations. Educational conditions according to which humans and animals are related . 3.J. M. STEPHENS-- Educational psychology ,is a systematic study of the growth and development of education. 4.CROW AND CROW--- Education psychology describes and explains the learning experiences of a person from birth to old age. 5.SCOUT-- The main principle given by psychology to education theory is that new knowledge should be based on development and knowledge. 6.BROWN-- Education is one of the means by which a person's behavior changes.

Definitions of Educational psychology

शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा -   शिक्षा मनोविज्ञान को अलग अलग मनोवैज्ञानिकों ने अपने अलग तत्थयो के आधार पर परिभाषित किया है --- १ . ब्राउन के अनुसार ,"शिक्षा एक ऐसी नियंत्रित क्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यव्हार में परिवर्तन किया जाता है।  " २ . कॉलसनिक के अनुसार ,"शिक्षा मनोविज्ञान ,मनोविज्ञान के सिद्धान्तों और अनुसन्धान का शिक्षा में प्रयोग है।  " ३. जे. एम.स्टीफन के अनुसार,"शिक्षा मनोविज्ञान ,शिक्षा की वृद्धि तथा विकास का विधिवत अध्ययन है।  " ४. सी. ई. स्किनर के  अनुसार ,"शिक्षा मनोविज्ञान उन अनुसन्धानो  को शैक्षिक परिस्थितियों में प्रयोग करता है ,जिन शैक्षिक परिस्थितियों के साथ मानव तथा प्राणी सम्बंधित हैं। " ५. स्काउट के अनुसार ,"मनोविज्ञान द्वारा शिक्षा सिद्धांत को दिया जाने वाला मुख्य सिद्धांत यह है कि नवीन ज्ञान का विकास पूर्वज्ञान के आधार पर किया जाना चाहिए। " ६. क्रो एवं क्रो के अनुसार ,"शिक्षा मनोवज्ञान ,व्यक्ति के जन्म से वृद्धावस्था तक ,सीखने के अनुभवों का वर्णन और स्पष्टीकरण करता है। "